सूर्यकांत निराला जीवन - परिचय In Hindi
सूर्यकांत निराला त्रिपाठी जीवनी हिंदी में :-
हिंदी साहित्य के छायावादी कवियों में से एक श्री " सूर्यकांत त्रिपाठी " जी जो एक लेखक , कहानीकार , निबंधकार , सम्पादक आदि थे , जिन्होंने अपनी कला से पुरे भारत में जाने जाते है , जिन्हें प्रगतिवादी , प्रयोगवाद और नयी काव्य का जनक मन जाता हिया | न ही केवल लेखक बल्कि , वे एक अच्छे कवी के रूप में भी जाने - जाते हिया , वो अपनी कविताओ के कारन बहुत ही प्रसिद्द है ! इनका 1899 ई. को पश्चिम बंगाल महिषादल में हुआ था | अपने प्रतिभा के धनि रचनाकार जिन्हें हिंदी - साहित्य में योगदान के लिए भारतीय पुरुस्कार "पद्म भूषण "से भी सम्मानी किया गया है !
सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी का प्रारंभिक - जीवन :-
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्म पश्चिम बंगाल के मिदनापुर नमक जिले के महिश्दल नमक गाँव में हुआ था , इनके पिता जी का नाम श्री पं. रामसहाय त्रिपाठी था , जो की एक सरकारी कर्मचारी थे | इनके पिता जी स्वाभाव से बहुत ही सख्त व्यक्ति थे |सूर्यकांत निराला "जी के माता - पिता उत्तर - प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले थे , नौकरी के सिलसिले से वे पश्चिम - बंगाल में काफी दिनों तक रहे | जब सूर्यकांत त्रिपाठी निराला " जी केवाल तीन वर्ष के थे , तभी उनकी माता जी का देहांत हो गया था , और जब वे बीस वर्ष के हुए तो उनके पिता जी का देहांत हो गया | निराला जी ने अपने पुरे जीवन काल में संघर्षो और मुसीबतों का बहुत ही ज्यादा सामना किया | सूर्यकांत जी एक शांत प्रकृति के व्यक्ति थे , उन्होंने कभी भी किसी से कोई मदद नही मांगी | उनकी प्रारंभिक शिक्षा पश्चिम - बंगाल के ही बंगाली माध्यम से पूरी हुई , बाद में उन्होंने स्वाध्याय से हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी का अध्यन किया | कुछ दिनों बाद निराला जी अपने गाँव उत्तर - प्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़कोला नामक गाँव में आ गये | गाँव आने के कुछ समय बाद उनका विवाह मात्र 15 वर्ष की आयु में मनोहर जी के साथ हुआ , उनकी पत्नी भी हिंदी - साहित्य मे रूचि रखती थी , उन्ही के प्रेरणा से निराला जी ने हिंदी - साहित्य में कविताये लिखनी शुरू की | मात्र शादी के पञ्च वर्ष बाद 20 की आयु में उनकी मृत्यु हो गयी !
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला " जी ने 1918 ई. में अपनी प्रथम नौकरी महिश्दल राज्य में प्राप्त की , यहाँ पर उन्होंने इस नौकरी मे 4 वर्षो तक कार्य कर अपना योगदान दिया | फिर उन्होंने 1922 ई. से अपना संपादन कार्य शुरू कर दिया , 1923 ई. में उन्होंने कोलकत्ता के "मतवाला "संपादक मंडल में कार्य किया , तत्पश्चात उनकी नियुक्ति गंगा पुस्तक माला कार्यलय लखनऊ में हुई , जहाँ पर उन्होंने 12 वर्ष तक अपनी नौकरी पूर्ण की , फिर बाद में उन्होंने 1935 - 40 वर्ष तक लखनऊ में ही रहकर स्वयं लेखन का कार्य किया !
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की काव्य विशेषता :-
अगर रचनाओ की बात करे तो सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने बहुत सी कविताओ उपन्यास , कहानि , निबंध की रह्च्नाये भी की है , उन्होंने अपनी पहली कविता " जन्मभूमि " भी स्वयं बनायीं जो , 1920 ई. में प्रकाशित हुई ! फिर उन्होंने अपना पहला संग्रह "अनामिका " पहला निबंध " बंग भाषा का उच्चारण " लिखा जो 1923 ई. में प्रकाशित हुआ , सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की कविताओ में विषयो की नवीन प्रयोगों की बहुला और विविधता है | उन्होंने सर्वप्रथम अपनी रचनाओ में खडी बोली को प्रधानता दी है | उनकी शैलियो में पाया जाने वाला संगीतात्मक और ओज उनकी काव्य की प्रमुख विशेषता है ! निराला जी हिंदी साहित्य में मुक्तछंद के प्रवर्तक माने जाते है !
निराला जी की साहित्य
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने बहुत सी किताबे भी लिखी है !
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने हिंदी भाषा में कई कविताये , लेख उपन्यास , कहानिया भी लिखी है !
- निराला जी ने अपनी रचनाओ के लिए व्यास सम्मान , साहित्यिक सम्मान , और पद्म भूषण जैसे बहुत से सम्मान भी प्राप्त किये है !
- निराला जी ने अपनी समकालीनो के अन्य कवियों के विपरीत ही उन्होने कविता में कल्पना का सहारा भी लिया है , और अपने वास्तविकता को चित्रित भी किया है !
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की शिक्षा :-
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने केवल कक्षा 10 तक की ही शिक्षा प्राप्त की थी ! फिर बाद में उन्होंने हिंदी , अंग्रेजी , बंगाली आदि भाषाओ का स्वाध्ययन भि किया !
सूर्यकांत त्रिपाठी निताला जी की विअवाहिक स्थिति :-
हिंदी साहित्य के प्रवर्तक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का विवाह मनोहर देवी से 15 वर्ष की आयु में हुआ था , लेकिन दुर्भाग्यवश मात्र 20 वर्ष की आयु में ही उनकी पत्नी का देहांत हो गया ! मनोहर जी एक शिक्षित महिला थी | उन्ही ने अपने पति निराला जी को हिंदी सिखाई |, उनकी एक बेटी भी थी , लेकिन स्पैनिश वीमारी इन्फ्लुएंजा से उसकी मृत्यु हो गयी ! आधे परिवार को खो देने से निराला जी पूरी तरह से टूट गये !
सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी की मृत्यु :-
महान रचनाकार , साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी 1961 ई. में एक गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गये , जिससे उस बीमारी और अनेक सांसारिक चिन्ताओ की वजह से 15 अक्टूबर 1961 ई. में 62 वर्ष की आयु में उनकी मृयु हो गयी !
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी रचनाये -
- अनामिका
- परिमल
- गीतिका
- तुलसीदास
- कुकुरमुत्ता
- अणिमा
- बेला
धन्यवाद्
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